श्रीमती उर्मिला यादव: शिक्षा और नेतृत्व की प्रेरणादायक यात्रा | महिला दिवस विशेष

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, हम आपको एक ऐसी प्रेरणादायक महिला से मिलवा रहे हैं, जिन्होंने शिक्षा, समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है – श्रीमती उर्मिला यादव। यह परिचय उनके धैर्य, संकल्प और समर्पण की कहानी है। उन्होंने ससुराल आने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी की और अपने परिवार के सहयोग से अपने क्षेत्र में शिक्षा के विकास के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। लेकिन उनकी यात्रा यहीं नहीं रुकी – उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और समाज में बदलाव लाने के लिए आगे बढ़ीं।

 

श्रीमती उर्मिला यादव का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा पंजाब में हुई। उनके पिता राजेंद्र सिंह यादव पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे और शिक्षा को अत्यधिक महत्व देते थे। शादी के बाद वह अपने गांव आ गईं, क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि अपने अंतिम समय में उनके बच्चे उनके साथ रहें।

 

उनका विवाह एक शिक्षित परिवार में हुआ, उनके पति नारद यादव हैं, वह भी शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में जुड़े हैं।  उनके ससुर श्री रामजी यादव एक प्रतिष्ठित दस्तावेज़ लेखक थे, और उनके चाचा ससुर रामजीत यादव पीएचडी धारक डॉक्टर थे, जो समाजसेवा और राजनीति से जुड़े थे। इस शिक्षित और समाजसेवी माहौल ने उन्हें समाज और शिक्षा के प्रति और अधिक जागरूक बनाया।

 

उर्मिला जी के अनुसार, परिवार के सभी लोगों का पूरा सहयोग रहा। उनके बिना यह सब संभव नहीं हो पाता। मेरे पति ने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया और हर कदम पर मेरा साथ दिया।”

शादी के बाद भी उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी और अंग्रेज़ी में एमए पूरा किया। लेकिन उनका सपना सिर्फ खुद को शिक्षित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह अपने समाज में भी शिक्षा का प्रकाश फैलाना चाहती थीं।

उन्होंने देखा कि बेलघाट क्षेत्र में कोई भी अंग्रेज़ी माध्यम का सीबीएसई स्कूल नहीं था, जिससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने में कठिनाई होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने 2009 में क्षेत्र का पहला इंग्लिश मीडियम सीबीएसई स्कूल शुरू किया।

शुरुआत में यह स्कूल चार कमरों के साथ उनके पिता के निजी भवन में संचालित हुआ। उनके स्वर्गीय श्री रामजी यादव ने इस प्रयास में पूरा सहयोग दिया। आज, उर्मिला जी का पूरा परिवार छह स्कूलों के संचालन में योगदान दे रहा है, जो उनके अथक परिश्रम और समर्पण का परिणाम है।

उनका उद्देश्य सिर्फ स्कूल खोलना नहीं था, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें घर से बाहर निकालकर शिक्षा के माध्यम से सशक्त करना भी था।

 

शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ-साथ वे महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता के लिए भी प्रेरित करती हैं। उन्होंने महिला शिक्षकों को रोजगार देकर समाज में एक नई सोच को बढ़ावा दिया।

शुरुआती दौर में जब स्कूल में महिला शिक्षकों की संख्या कम थी, तो उन्होंने गांव की महिलाओं को प्रेरित किया और उन्हें शिक्षिका बनने के लिए प्रशिक्षित किया। उनका मानना है कि यदि महिलाओं को सही अवसर और सहयोग मिले, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।

शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने जिला पंचायत चुनाव लड़ा और उसमें जीत हासिल की। आज उनकी पहचान एक शिक्षाविद् के साथ-साथ जिला पंचायत सदस्य के रूप में भी होती है। वे जिला अध्यक्ष साधना सिंह की करीबी मानी जाती हैं।

आज उनकी पहचान एक शिक्षाविद् के साथ-साथ जिला पंचायत सदस्य के रूप में भी होती है। उनके इस सफर में जिला अध्यक्ष साधना सिंह का मार्गदर्शन और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।

 

महिला सशक्तिकरण और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

महिला सशक्तिकरण का विषय उनके लिए हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। उनका मानना है कि महिलाओं को सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज में बराबरी का स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत अमेरिका में हुई, जब वहां की महिलाओं ने अपने अधिकारों की मांग की। 1908 में उन्होंने समानता और मतदान के अधिकारों के लिए हड़ताल की। इसके बाद अमेरिका में महिलाओं के अधिकारों को लेकर आंदोलन चला और “Each for Equal” का नारा दिया गया।

इसके बाद हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाने लगा ताकि महिलाओं के संघर्ष और उनके अधिकारों को सम्मान दिया जा सके।

 

श्रीमती उर्मिला यादव की यात्रा यहीं समाप्त नहीं होती। उनका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक योगदान देना है। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में समानता की भावना को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही हैं। उनका मानना है कि शिक्षा और समाजसेवा के माध्यम से ही एक बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।

उनकी कहानी हम सभी के लिए प्रेरणादायक है और यह दर्शाती है कि सच्ची लगन और मेहनत से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।

 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ!

💐 श्रीमती उर्मिला यादव जैसी सशक्त महिलाओं को सलाम, जो समाज में बदलाव की अलख जगा रही हैं! 💐

2 comments

  1. क्षेत्र की प्रतिभाओं समाजसेवियों शिक्षासेवियों एवं साहसिक व्यक्तित्व को उनके शानदार परिचय के रूप में आपने जो मंच स्थापित किया है उसके लिए आपका आभार धन्यवाद। निश्चित रूप से श्रीमती उर्मिला नारद यादव जी एक साहसी कर्तव्यनिष्ठ और शिक्षा हेतु समर्पित सुशील एवं सभ्य महिला है। आपने उनके बारे में महिला सशक्तिकरण दिवस पर विशेष परिचय एवं जानकारी देकर सराहनीय कार्य किया है। उनको ढेर सारी शुभकामना।
    आपका हार्दिक आभार अभिनंदन।

    • “श्रीमती उर्मिला यादव जी को नमन! शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। एक सफल शिक्षिका और जिला पंचायत सदस्य के रूप में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। ऐसी प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियाँ न केवल हमें प्रेरित करती हैं बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी नई दिशा देती हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

      • Phone - 9892460260

    Leave a comment

    Your email address will not be published. Required fields are marked *