श्रमदान और शिक्षा: समाज और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ

समाज और राष्ट्र के निर्माण में श्रमदान और शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्रमदान जहां समाज को स्वच्छ और सशक्त बनाने में सहायक होता है, वहीं शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को संस्कारित और आत्मनिर्भर बनाती है। इसी भावना को साकार करने के लिए पंडित हरि सहाय पीजी कॉलेज, जैती बेलघाट, गोरखपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के विशेष शिविर के तीसरे दिन स्वयंसेवकों ने श्रमदान किया।

शिविर स्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें स्वयंसेवकों ने पंडित हरि सहाय शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान और मलिन बस्तियों की सफाई की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना और समाज में स्वच्छता की आदतों को बढ़ावा देना था। श्रमदान के उपरांत मलिन बस्ती में एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया, जिससे आम जनता को स्वच्छता के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया।

 

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: शिक्षा का संदेश

दोपहर के बाद बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया, जिसका विषय बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” था। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंडित हरि सहाय शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य श्री उमेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि समाज में बेटियों के अस्तित्व को सुरक्षित रखने और उन्हें समान अवसर प्रदान करने के लिए लिंग भेदभाव को समाप्त करना अनिवार्य है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सर्वेश दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि बेटियां दो परिवारों की दीपशिखा होती हैं। यदि उन्हें सही शिक्षा और मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के उत्थान में योगदान दे सकती हैं। शिक्षा से ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है और एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखी जा सकती है।

इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी द्वय डॉ. उमेश शुक्ला और डॉ. विनोद मिश्रा सहित अन्य शिक्षकगण एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अवनींद्र शुक्ला, डॉ. कमलकांत मिश्रा, प्रणव शुक्ला, हरिशचंद्र सिंह, इकबाल अहमद खान, डॉ. सचिंद्र कुमार, मृत्युंजय कुमार त्रिपाठी, दिनेश शुक्ला, संतोष श्रीवास्तव, संतोष कुमार मिश्रा आदि के सहयोग से किया गया।

श्रमदान और शिक्षा, दोनों ही समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जहां श्रमदान समाज को स्वच्छ और सुंदर बनाता है, वहीं शिक्षा एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाती है। इस प्रकार, यदि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छता और शिक्षा का महत्व समझाया जाए, तो एक बेहतर और विकसित राष्ट्र का निर्माण संभव है।

 

 

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